बंगाल टाइगर का बढ़ता कद

winnerबंगाल टाइगर की दहाड़ आजकल क्रिकेट की दुनिया में हर जगह सुनाई पड़ रही है. ऐसा लगता है कि बांग्लादेश का कायाकल्प हो गया है. श्रीलंका की तरह बांग्लादेशी क्रिकेट टीम का एकदिवसीय क्रिकेट की एक बड़ी टीम के रूप में हो रहा है. बांग्लादेश की इस टीम ने पिछले आठ महीनों में दुनिया की टॉप पांच टीमों को एकदिवसीय सीरीज में पटखनी दी है. यह सिलसिल पिछले साल नवंबर में शुरू हुआ था. बांग्लादेश ने उस सीरीज में जिंबाब्वे को 5-0 के अंतर से मात दी थी. यह जीत जिंबाब्वे जैसा छोटी टीम के सामने थी, इसलिए इसपर लोगों ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था और उस वाकये को भूल गए. लेकिन यह चिंगारी धीरे से आग में बदल गई. बांग्लादेश की इस आग की लपेट में आने वाली सबसे पहली टीम थी, इंग्लैंड. बांग्लादेश नें विश्वकप में इंग्लैंड को मातदेकर लीग मैचों के बाद ही घर वापसी करा दी. लीग मैच के इस अहम मुक़ाबले में इंग्लैंड को 15 रनों से मात देकर बांग्लादेश ने पहली बार विश्वकप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया. विश्वकप में 5 मैचों में से 3 में जीत हासिल करने के बाद बांग्लादेश अंतिम आठ में पहुंची. लेकिन वहां बांग्लादेश का मुक़ाबला गत विजेता भारत से हुआ और हार के बाद उसका विश्वकप में सफर खत्म हो गया. हालांकि बांग्लादेश की टीम ने इस हार के लिए खराब अंपायरिंग को जिम्मेदार ठहराया था.

विश्वकप के बाद बांग्लादेश दौरे पर पहुंची पाकिस्तानी टीम पर बांग्लादेश ने 3-0 से धमाके दार जीत दर्ज की तो लोगों दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो गए. इसके बाद विश्वकप के सेमीफाइनल तक पहुंची टीम इंडिया बांग्लादेश दौरे पर पहुंची. विश्वकप में केवल एक मैच हारने वाली टीम इंडिया पाकिस्तान की हार को ध्यान में रखकर अपनी पूरी ताकत और दल बल के साथ बांग्लादेश दौरे पर पहुंची थी. सीरीज के पहले ही मैच में टीम इंडिया को 79 रनों से पटखनी देकर बांग्लादेश ने विश्वकप के क्वार्टर फाइनल में मिली हार का बदला ले लिया और हर किसी को सकते में डाल दिया. टीम इंडिया के खिलाफ जीत के हीरो रहे नए गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान. उन्होंने 50 रन देकर पांच भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. इसके बाद सीरीज के दूसरे मैच में भारत को 6 विकेट से मात दी और पहली बार भारत के खिलाफ सीरीज जीतने में कामयाब हुई. इस मैच में भी मुस्ताफिजुर भारतीय गेंदबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और इस बार 6 खिलाड़ियों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. तीसरे में टीम इंडिया ने जीत हासिल की और बांग्लादेश ने 2-1 के अंतर से सीरीज अपने नाम कर ली.

इसके बाद  दक्षिण अफ्रीकी टीम बांग्लादेश के दौरे पर आई. पहले खेले गए दो टी-20 मुकाबलों में बांग्लादेश को हार का सामना करना लेकिन एक दिवसीय मैचों की शुरूआत होते ही उनकी भाव भंगिमा बदल गई. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में भले ही बांग्लादेश को हार का सामना करना पड़ा लेकिन उसने जोरदार वापसी करते हुए दूसरे मैच में बराबरी की और तीसरे मैच में जीत हासिल कर सीरीज पर कब्जा कर लिया. यह बांग्लादेश की घरेलू सरजमीं पर लगातार चौथी एकदिवसीय श्रृंखला की जीत है.पिछले बीस एक दिवसीय मैचों में से बाग्लादेश ने 15 मैचों में जीत हासिल की है और 5 में उसे हार का सामना करना पड़ा है. घर पर उन्हें केवल दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा है.

हाल के  दिनों में बांग्ला शेरों ने जिन टीमों का शिकार किया है उनमें से कोई भी टीम दोयम दर्जे की नहीं थी. इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बांग्लादेशी क्रिकेट का नया दौर आ गया है, बांग्लादेशी क्रिकेट का नया अध्याय शुरू हो गया है, भारत के बांग्लादेश दौरे के समय दिखाया जाने वाला विज्ञापन बच्चा अब बच्चा नहीं रह गया है सही साबित हो रहा है. बांग्लादेश को हर देश अब गंभीरता से लेने लगा है और बांग्लादेश से डरने भी लगा है, बांग्लादेश के हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनका डरना भी जायज है. इसी प्रदर्शन की बदौलत बांग्लादेश वन-डे टीम रैंकिंग में टॉप 8 टीमों में शामिल रहते हुए 2017 में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी के लिए क्वालीफाई कर लिया है.

जिंबाब्वे के पूर्व कप्तान हीथ स्ट्रीक के बांग्लादेश का गेंदबाजी कोच बनने के बाद से बांग्लादेश की तेज गेंदबाजी में अप्रत्याशित परिवर्तन आया है. बांग्लादेेशी गेंदबाज अब ज्यादा खुलकर और अनुशासित तरीके से गेंदबाजी करते हैं. जो कद विश्व क्रिकेट में जिंबाब्वे का था अमूमन कुछ वैसा ही आज बांग्लादेश का भी है. जिंबाब्वे का कप्तान रहते हुए उन्होंने जीत और हार के बीच के कुछ कदम के फासले को कई बार देखा है.वह बतौर कोच इस कमी को पूरा होते देखना चाहते हैं. इसलिए गेंदबाजों के साथ अपने करियर का पूरा अनुभव बांट रहे हैं. इसके अलावा मुशरफे मुर्तजा के कप्तान बनने के बाद तेज गेंदबाजी वाली आक्रामकता पूरी टीम में नज़र आने लगी है, हालांकि हर कप्तान की कप्तानी का अंदाज जुदा होता है उसी जुदा अंदाज का सीधा असर टीम के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है. मैदान पर टीम एकजुट नज़र आती है और विकेट मिलने का सेलिब्रेशन भी बड़े आक्रामक अंदाज में होता है. यह टीम की सफलता का एक प्रमुख कारण है.

दूसरी तरफ टीम के कई पूर्व कप्तान और वर्तमान कप्तान के साथ खेल रहे हैं लेकिन इन सभी के बीच अहम का टकराव जैसी कोई चीज नज़र नहीं आती है. ड्रेसिंग रूम का माहौल अच्छा हो तो वह मैदान में खेल में भी नज़र आता है. जिस वक्त श्रीलंका ने विश्वकप पर कब्जा किया था उस वक्त श्रीलंकाई टीम का माहौल भी अर्जुन रणतुंगा की कप्तानी में कुछ इसी तरह का था. उनकी उस टीम को डेव वॉह्टमोर जैसे कोच का साथ मिला तो उस श्रीलंकाई टीम ने अनहोनी को होनी कर दिखाया. आज की बांग्लादेशी टीम भी उसी ट्रेक पर आगे बढ़ रही है. धीरे-धीरे टीम संतुलित होती जा रही है. टीम के बल्लेबाजों के पास आज अनुभव भी है और खेल की सही तकनीक भी. मोहम्मदुल्लाह और तमीम इकबाल खिलाड़ी बल्लेबाजी की रीढ़ है, वहीं शाकिब अल हसन अपनी धारदार फिरकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी से टीम को संतुलित करते हैं. वहीं कप्तान मशरफे मुर्तजा के नेतृत्व में तेज गेंदबाज विरोधी टीमों पर कहर ढा रहे हैं, उसमें मुस्ताफिजुर जैसे नए गेंदबाज सोने पे सुहागा कर रहे हैं.

बांग्लादेश के खिलाड़ी अब जीत हार के डर के बिना मैदान पर उतरते हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की उम्मीद करते हैं. टीम हार के डर से ऊपर उठ चुकी है, लेकिन उसे अभी सफलतायें घरेलू सरजमीं पर ही मिल रही है. विदेशी धरती पर उनकी इम्तिहान होना अभी बाकी है. हाल ही में जिन टीमों के खिलाफ बांग्लादेश ने जीत हासिल की है उन सभी के खिलाफ उसके खेलने का अंदाज तकरीबन एक जैसा था. बांग्लादेश के क्रिकेटर जिस तरह जिस तरह एक जुट होकर खेल रहे हैं, यह अन्य टीमों के लिए सीख है. टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का सही मिश्रण है. टीम में चार ऑलराउंडर(महमुदुल्लाह, शाकिब अल हसन, नासिर हुसैन और मशरफे मुर्तजा) खिलाड़ी है, जो किसी भी समय अपनी गेंदबाजी या बल्लेबाजी या फिर दोनों की बदौलत मैच का रुख बदलने का माद्दा रखते हैं. मुश्फिकुर रहीम जैसा विकेट कीपर बल्लेबाज टीम को और संतुलित बनाती है. यदि गेंदबाजी टीम की ताकत है तो बल्लेबाज भी अपनी भूमिका के साथ न्याय कर रहे हैं. टीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि टीम किसी एक खिलाड़ी पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. हर खिलाड़ी अपने दिन मैच जिताउ प्रदर्शन कर जाता है. इसके साथ ही टीम की बेंच स्ट्रेंथ भी मजबूत है, किसी खिलाड़ी के चोटिल होने पर उसकी कमी महसूस नहीं होती है.

सौम्य सरकार जैसे युवा बल्लेबाज जिस तरह आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे हैं वह काबिले तारीफ है. उनकी आक्रामक  बल्लेबाजी के कारण विरोधी गेंदबाज दबाव में आ जाते हैं  और दूसरे बल्लेबाजों का मनोबल बढ़ता है और वह इसका फायदा उठाते हैं. सौम्य ने अब तक खेले 16 एकदिवसीय मैचों में 50 से भी अधिक के औसत से रन बनाये हैं. उनका स्ट्राइक रेट भी 100 से ज्यादा है. उनकी वजह से तमीम इक़बाल और मुश्फिकुर रहीम जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का दबाव और टीम की निर्भरता भी कम हुई है. बांग्लादेश क्रिकेट लीग में विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिल रहा है, इस वजह से युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार आ रहा है. इसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी नज़र आ रहा है. विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने की वजह से खिलाड़ियों के आत्मविश्वास में भी बढ़ोत्तरी हो रही है, और वे घरेलू क्रिकेट खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव हासिल कर रहे हैं. इसके अलावा बांग्लादेश का क्रिकेट बोर्ड दुनिया का पांचवा सबसे अमीर बोर्ड है. यह पैसा क्रिकेट के विकास में खर्च ही नहीं हो रहा है. यदि ऐसा होता रहा तो बांग्लादेश क्रिकेट की काया पलट होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. कप्तान मशरफे मुर्तजा टीम को सामने से लीड कर रहे हैं, आक्रामक के साथ साथ वह चतुर कप्तान भी हैं, उनमें क्रिकेट की अच्छी समझ है जो कि उनकी कप्तानी में झलकती है. वह खुद के प्रदर्शन के साथी खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रदर्शन करने का उदाहरण पेश करते हैं. वह समय समय पर प्रयोग करने से भी नहीं हिचकते हैं. फील्ट प्लेसमेंट से लेकर बैटिंग ऑर्डर में वह जरूरत के अनुरूप बदलाव करते हैं. यह सब उन्हें एक बेहतर और सफल कप्तान बनाता है. उनकी सफलता सीरीज दर सीरीज टीम की जीत के रूप में दिखाई पड़ रही है. यदि ऐसा ही रहा तो बंगालटाइगर जल्दी ही दुनिया की टॉप 5 टीमों में शुमार हो सकती है, लेकिन इसके लिए इनके लिए विदेशी धरती पर जीत हासिल करना जरूरी होगा.

Leave a Reply