विराट कोहलीः नए भारत की नई तस्वीर

151-360x216महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर विराट कोहली की पाकिस्तान के ख़िला़फ खेली गई (183 रनों ) धमाकेदार पारी के बाद भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित देखकर संन्यास लेने का विचार कर सकते हैं. विराट की इस पारी के बाद इंग्लैंड के केविन पीटरसन ने ट्वीट कर कहा कि, एक भारतीय सुपर स्टार का एकदिवसीय क्रिकेट में उदय हो चुका है. महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा कि विराट की यह पारी भारत की नई पीढ़ी की कुछ भी पा लेने की ललक, प्यास और जज़्बे को दिखाती है…बहुत ख़ूब विराट…

दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे विराट शुरू से ही अपने नाम के अनुरूप काम करने लगे. पहली बार लोगों का ध्यान विराट की तऱफ तब गया था, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी के दिल्ली-कर्नाटक मैच के दौरान पिता की मृत्यु की ख़बर सुनने के बावजूद खेलना जारी रखा और दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण 90 रन बनाए. दिल्ली रणजी टीम के तत्कालीन कप्तान मिथुन मन्हास ने विराट की इस पारी को दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल बताया था. उस दिन के बाद विराट बहुत परिपक्व हो गए, उन्होंने हर मैच को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया. उसके बाद क्वालालंपुर में हुए अंडर-19 विश्वकप के लिए विराट को भारतीय टीम का कप्तान घोषित किया गया. इस विश्वकप के दौरान विराट की कप्तानी एवं बल्लेबाज़ी की बहुत प्रशंसा हुई और भारत अंडर-19 विश्वकप विजेता बना. विराट की इस उपलब्धि ने उनके लिए भारतीय क्रिकेट टीम के दरवाजे खोल दिए. 2009 में आस्ट्रेलिया में हुए इमर्जिंग प्लेयर्स टूर्नामेंट में भारत की जीत में विराट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 7 मैचों में 2 शतक और 2 अर्द्धशतक के साथ 398 रन बनाकर विराट शीर्ष पर रहे.

विराट का भारतीय टीम में पहली बार चयन 2008 में श्रीलंका में हुए आइडिया कप में सचिन एवं सहवाग की ग़ैर मौजूदगी में हुआ था. उस दौरे में विराट का प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा, मगर विराट द्वारा खेली गई 37 और 54 रनों की पारी की वजह से भारत सीरीज जीतने में कामयाब रहा. यह भारत की श्रीलंका में उसके ख़िला़फ पहली वन डे सीरीज जीत थी. इसके बावजूद विराट को टीम में जगह के लिए किसी प्रमुख खिलाड़ी के घायल होने का इंतज़ार करना पड़ता था. विराट को टीम से बाहर रहना कतई पसंद नहीं था, वह ख़ुद को मिलने वाले अवसर भुनाते रहे और टीम में अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रहे. विराट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहली छाप युवराज सिंह की ग़ैर मौजूदगी में श्रीलंका के ख़िला़फ 2009 में कोलकाता के ईडन गार्डन में गौतम गंभीर के साथ की गई 224 रनों की साझेदारी के दौरान छोड़ी. इस पारी में विराट ने 107 रन बनाए. उनकी इस साहसिक पारी की वजह से भारत 3-1 से सीरीज जीतने में कामयाब रहा. गौतम गंभीर ने इस मैच का अपना मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार विराट को दे दिया. इस दिन के बाद विराट ने फिर कभी मुड़कर नहीं देखा और सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए.

2010 में वरिष्ठ खिलाड़ियों की ग़ैर मौजूदगी में जिम्बाब्वे दौरे के लिए विराट को भारतीय टीम का उपकप्तान बनाया गया. इस दौरान विराट ने सबसे कम मैचों में 1000 रन बनाने वाले भारतीय होने का गौरव हासिल किया. वह 2010 में 25 मैचों में तीन शतकों सहित 995 रन बनाकर दूसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी बने. विराट को 2011 के विश्वकप में सुरेश रैना पर वरीयता दी गई. उन्होंने कप्तान धोनी के इस फैसले को सही साबित करते हुए बांग्लादेश के ख़िला़फ शतक ठोंक कर क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी. विराट ने विश्वकप के 9 मैचों में 35.25 के औसत से कुल 282 रन बनाए और भारत को विश्वकप विजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. इसके बाद उन्हें टेस्ट टीम में भी जगह मिल गई, मगर वेस्टइंडीज के विरुद्ध कैरेबियाई धरती पर उनका टेस्ट पदार्पण निराशाजनक रहा. इसके बाद इंग्लैंड के ख़िला़फ टेस्ट मैचों में भी विराट को निराशा हाथ लगी, मगर एक दिवसीय क्रिकेट में उनका करिश्माई प्रदर्शन जारी रहा. भारतीय टीम के इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे में निराशाजनक प्रदर्शन के बीच वह अपनी काबिलियत साबित करते रहे. स्वालेक स्टेडियम में खेली गई विराट की 107 रनों की शतकीय पारी भी भारत को इंग्लैंड में जीत का स्वाद नहीं चखा सकी. ऑस्ट्रेलिया दौरे की शुरुआत में विराट कोहली की आलोचना हो रही थी. लगातार चार पारियों में नाकाम होने के बाद कोहली को क्रिकेट दिग्गजों की नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों की टिप्पणियों का भी शिकार होना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपने बल्ले से सबको शांत कर दिया. विराट ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िला़फ एडीलेड में 116 रनों के साथ अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया. वह इस दौरे में टेस्ट मैचों में शतक बनाने वाले अकेले और सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी थे. विराट का चमत्कारिक रूप एक दिवसीय मैचों के दौरान सामने आया. उन्होंने होबार्ट में श्रीलंका के ख़िला़फ 86 गेंदों पर 133 रनों की आतिशी पारी खेली. इस पारी को विराट ने अपनी सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय पारी बताया था. इसी दौरान विराट ने 9 शतकों सहित सबसे कम मैचों में 3000 रन पूरे करने का नया कीर्तिमान भी बनाया. विराट की सफलता की यह तो केवल शुरुआत थी.

ऑस्ट्रेलिया में किए गए धमाकेदार प्रदर्शन का ईनाम विराट को टीम इंडिया की उपकप्तानी के रूप में मिला, जिसका जश्न उन्होंने बांग्लादेश में खेले गए एशिया कप में दो शतक औरं एक अर्द्धशतक के साथ मनाया. पाकिस्तान के ख़िला़फ 183 रनों की ऐतिहासिक पारी ने विराट को देश की आंखों का तारा बना दिया. लोग अब विराट को सचिन एवं राहुल द्रविड़ के उत्तराधिकारी के रूप में देखने लगे हैं. विराट की परिपक्वता, सफलता के लिए उनकी भूख और आवश्यकता के अनुरूप बल्लेबाज़ी के तरीक़े में बदलाव कर सकने की क्षमता उन्हें अन्य युवा बल्लेबाज़ों से अलग करती है. टेनिस स्टार रोजर फेडरर को अपना आदर्श मानने वाले विराट ने विभिन्न परिस्थितियों और आक्रमण के सामने ख़ुद को अपने खेल से साबित किया है. विराट क्रिकेट के कैनवास पर नए भारत की नई तस्वीर बना रहे हैं. 

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